रामनाथ कोविंद होगें एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार

कई सारी मथापच्ची और अटकलों के बाद बीजेपी संसदीय बोर्ड ने राष्ट्रपति के उम्मीदवार के तौर पर बिहार के गवर्नर राम नाथ कोविंद के नाम पर मुहर लगा दी है।

कोविंद कम बोलने वाले शालीन चेहरे हैं। विवादों से नाता न के बराबर रहा है. दलित हैं और उत्तर प्रदेश के कानपुर से आते हैं। कोरी बिरादरी का चेहरा हैं जो कि उत्तर प्रदेश में दलितों की तीसरी बड़ी आबादी है और बुंदेलखंड क्षेत्र में अपना खासा प्रभाव रखती है। कोविंद का नाम इसीलिए विपक्ष को एक झटका है।

कोविंद को राष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषितकर बीजेपी ने न सिर्फ लोगों को चौंकाया है, बल्कि राजनीतिक तौर पर एक तीर से कई शिकार भी किए हैं। राष्ट्रपति के चुनाव में अपने उम्मीदवार की जीत के लिए बीजेपी के पास जरूरी वोट हैं, इसलिए अब राम नाथ कोविंद का अगला राष्ट्रपति बनना तय है।

बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राम नाथ कोविंद के नाम का एलान किया। उन्होंने कोविंद के नाम का एलान करते हुए ये भी कहा कि पार्टी के फैसले की जानकारी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी दी गई है।

बीजेपी की कोशिश थी कि आम सहमति से राष्ट्रपति बने। हालांकि उम्मीदवार का नाम न बताने के कारण विपक्षी पार्टियों ने समर्थन का कोई आश्वासन नहीं दिया।

कोविंद का संबंध दलित समाज से है ऐसे में जो पार्टियां उनके विरोध में जाएंगी, बीजेपी उन्हें दलित विरोधी बताने में जरा भी देर नहीं करेगी। इसके साथ ही बीजेपी ने खुद के दलित विरोधी छवि से उबरने का तरीका ढूंढा है। दूसरी तरफ बिहार की सत्ताधरी पार्टियों को भी असमंजस में डाल दिया है। लालू-नीतीश के लिए मुसीबत ये है कि आखिर वो अपने ही राज्यपाल का राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर विरोध कैसे करें और वो भी तब जब उनका संबंध दलित वंचित समाज से हो।

बीजेपी के इस मास्टर स्ट्रोक का विरोध शायद ही कोई करे। हालांकि रामनाथ कोविंद के नाम से सबसे बड़ा धक्का आडवाणी गुट को लगा होगा क्योंकि मोदी को देश की सत्ता मिलने के बाद यह माना जाने लगा था कि देश के अगले राष्ट्रपति लाल कृष्ण आडवाणी ही होंगे।

 

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *