बिपिन रावत को थल सेना और बीरेंदर सिंह धनोआ को वायु सेना की सौपी जाएगी कमान

सरकार ने रविवार को नए आर्मी चीफ और एयरफोर्स चीफ के नाम का ऐलान किया।वरिष्ठता को दरकिनार कर सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को नया आर्मी चीफ बनाया है। बिपिन रावत 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे जनरल दलबीर सिंह की जगह लेंगे। रावत इंडियन आर्मी के 26वें चीफ होंगे। वहीं दुसरी तरफ केंद्र सरकार ने एयर मार्शल बीरेंदर सिंह धनोआ को एयरफॉर्स का नया प्रमुख बनाया है। वे वायुसेना के 22वें चीफ हैं और एयर चीफ मार्शल अरुप राहा की जगह लेंगे।

धनोआ 1978 में फाइटर पायलट के रूप में वायुसेना में शामिल हुए थे। वे क्‍वालिफाइड फ्लाइंग इंस्‍ट्रक्‍टर रहे हैं और कई तरह के लड़ाकू विमान उड़ा चुके हैं। कारगिल की जंग के दौरान उन्‍होंने फाइटर स्‍कवाड्रन को कमांड किया था और खुद ने भी रात के समय कई बार हमले बोले थे। इस कार्रवाई के लिए उन्‍हें युद्ध सेवा मेडल और वायुसेना मेडल से सम्‍मानित किया गया था। साल 2015 में उन्‍हें अति विशिष्‍ट सेवा मेडल दिया गया था। धनोआ ने फाइटर बेस के स्‍टेशन कमांडर और विदेशों में भारतीय सैन्‍य प्रशिक्षण टीम के नेतृत्‍व जैसी जिम्‍मेदारियां निभा चुके हैं। वे तीसरे सिख हैं जो वायुसेना प्रमुख बने हैं। उनसे पहले अरजन सिंह और दिलबाग सिंह यह जिम्‍मेदारी संभाल चुके हैं।

वहीं लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत मूल रुप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं। उन्होने 1978 में आर्मी ज्वाइन की थी, तब वे 11वीं गोरखा राइफल्स की 5वीं बटालियन में थे। जनवरी 1979 में आर्मी में मिजोरम में पहली नियुक्ति पाई। बिपिन रावत को  ऊंचाई पर जंग लड़ने और काउंटर-इंनसर्जेंसी ऑपरेशंस यानी जवाबी कार्रवाई के एक्सपर्ट के तौर पर जाना जाता है। उन्हें कश्मीर का भी एक्सपर्ट माना जाता है. साउथ कमांड की कमान संभालते हुए उन्होंने पाकिस्तान से सटी पश्चिमी सीमा पर मैकेनाइजड-वॉरफेयर के साथ-साथ एयरफोर्स और नेवी के साथ बेहतर तालमेल बैठाया। बिपिन रावत ने कश्मीर घाटी में पहले नेशनल राइफल्स में ब्रिगिडेयर और बाद में मेजर-जनरल के तौर पर इंफेंट्री डिवीजन की कमान संभाली।

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