क्या आपको पता है पत्नीटॉप सुरंग की पूरी कहानी ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अत्याधुनिक और देश की सबसे लंबी चेनानी-नाशरी सुरंग का उद्घाटन किया औऱ हम सबने इस सुरंग के बारे में जाना।  लेकिन क्या हमें ये पता था कि इससे पहले इस सुरंग को पत्नीटॉप सुरंग के नाम से भी जाना जाता रहा है।

अगर आप नहीं जानते हैं तो दुविधा में ना रहें। पहले पत्नीटॉप कही जाने वाली सुरंग ही अब चेनानी-नाशरी नाम से जानी जा रही है। 

चेनानी-नाशरी या पत्नीटॉप सुरंग की पूरा विशलेषण-

इस टनल की लबाई है 9.2 किलोमीटर। विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों में आरएफएंडएफएस ट्रांसपोर्ट नेटवर्क लिमिटेड ने देश की सबसे बड़ी सड़क परिवहन टनल का निर्माण रिकॉर्ड साढ़े चार साल में किया है। इसका नाम चनैनी-नाशरी टनल रखा गया है क्योंकि यह जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर चनैनी से शुरू होकर नाशरी नामक स्थान पर जाकर खुलती है। 286 किलोमीटर लंबी जम्मू-श्रीनगर चार लेन राजमार्ग वाली परियोजना का यह हिस्सा 9.2 किलोमीटर लंबी दोहरी ट्यूब सुरंग पर 23 मई 2011 मे शुरू हुआ। इस सुरंग मार्ग पर 3,720 करोड़ रुपए की लागत आई है।

वहीं इसमें  मुख्य सुरंग का व्यास 13 मीटर है, जबकि समानांतर निकासी सुरंग का व्यास 6 मीटर  है। मुख्य और निकासी सुरंगों में 29 स्थानों पर पार मार्ग बनाये गये हैं जो हर 300 मीटर की दूरी पर स्थिति हैं। यह देश की पहली पूर्ण रूप से एकीकृत सुरंग प्रणाली वाली सुरंग है।

इस सुरंग की सहायता से जम्मू और श्रीनगर के मध्य दूरी 30.11 कि.मी. (18.7 मील) रह गयी और यात्रा समय में दो घण्टे की कटौती हो गयी। पत्नीटॉप पर सर्दियों में बर्फबारी और हिमस्खलन  के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर बाधा उत्पन्न होती थी तथा प्रत्येक शीतकाल में कई बार वाहनों की लम्बी कतार के कारण भी बाधा उत्पन्न होती थी। कई बार कई दिनों तक कतार में रहना पड़ता था। सुरंग पत्नीटॉप, कुद   और बटोद को उपमार्गों से जोड़ती है जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर सर्दियों में ट्रैफ़िक जाम की समस्या को कम किया है।

यह एक ऐसा टनल है, जिसके भीतर और बाहर लगे हैं 124 सीसीटीवी कैमरे। हर कैमरे की दूरी 75 मीटर है। 360 डिग्री घूमने वाले कैमरे। सुरंग के अंदर घुटन महसूस न हो इसलिए इसे पूरी तरह हवादार बनाया गया है, साथ ही निगरानी के लिए संचार व्यवस्था का दुरुस्त इंतजाम किया गया है।

सुरंग में हर 150 मीटर पर एसओएस बॉक्स लगे हैं। आपातकालीन स्थिति में यात्री इनका इस्तेमाल हॉट लाइन की तरह कर सकेंगे। आईटीसीआर से मदद पाने के लिए यात्रियों को एसओएस बॉक्स खोलकर बस ‘हैलो’ बोलना होगा। एसओएस बॉक्स में फर्स्ट एड का सामान और कुछ जरूरी दवाएं भी होंगी ताकि किसी तरह का हादसा होने पर उन्हें तुरंत जरुरी मदद मिल सके।

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